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31 July, 2020

सबको खुश देखना चाहता हूँ

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ

दिल हल्का करने को मैं शायरी सुनाता हूँ

ये शायरी नहीं है,और ना हुनर है मेरा
ये दर्द है, जिसे मुस्कुराहटों से छुपाता हूँ

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ....

मुझे जैसे लोग अक्सर यूँ ही भुला दिए जाते हैं
मैं बात सबको याद दिलाना चाहता हूं

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ....

अंधे निकालते हैं  कमिया मेरे क़िरदार में और...
बहरों को ये शिकायत है कि गलत बताता हूं ...!!!

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ....

हर किसी ने जिंदगी भर नकारा समझा मुझको
जिंदगी तू वो किताब तो नहीं जिसे मैं पढ़ना चाहता हूं

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ....

जब बेवफाई की बात आई, अव्वल हम ही निकले....!!
गवाही आईने में क्या दी जानना चाहता हूं

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ....

महफिल थी दुआओं की,तो मैंने भी एक दुआ मांग ली !!"
मैं तो बस सबको खुश देखना चाहता हूँ

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ....

अब तो खुशी दे कर देख ले ए खुदा
मैं इन दुखों से नहीं मरना चाहता हूं

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ....

वो "मैं "जो मुझमें जिंदा था, मार दिया मैंने !!
मैं अपने ख़ुदा से मिलना चाहता हूँ

हज़ारों दिक्कतें हैं, यह पहली बताई थी...
दिल हल्का करने को मैंने शायरी सुनाई थी..

05 November, 2015

अक्सर मुस्कुरा लिया करता हूँ

उलझने हैं बहुत...
सुलझा लिया करता हूँ ,
फोटो खिंचवाते वक़्त मैं अक्सर...
मुस्कुरा लिया करता हूँ "
क्यूँ नुमाइश
करूँ मैं अपने माथे पर शिकन की,
मैं अक्सर मुस्कुरा के इन्हें..
मिटा दिया करता हूँ.."
क्यूंकि..
"जब लड़ना है खुद को खुद ही से
हार-जीत में इसलिए कोई फ़र्क नहीं रखता हूँ
हारूं या जीतूं कोई रंज नहीं
कभी खुद को जिता देता हूँ
कभी खुद से जीत जाता हूँ.....!!"
इसीलिए अक्सर मुस्कुरा लिया करता हूँ।

08 July, 2015

उनसे भी मोहब्बत थी

आगे सफर था और पीछे हमसफर था....

रूकते तो सफर छूट जाता और चलते तो हम सफर छूट जाता...

मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी..

ए दिल तू ही बता...

उस वक्त मैं कहाँ जाता...

मुद्दत का सफर भी था और बरसो का हम सफर भी था
रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते....

यूँ समँझ लो....

प्यास लगी थी गजब की...

मगर पानी मे जहर था...

पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते...

27 July, 2014

आहिस्ता चल ज़िन्दगी..

आहिस्ता चल ज़िन्दगी, अभी कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है,
कुछ दर्द मिटाना बाकी है, कुछ फ़र्ज़ निभाना बाकी है;
रफ्तार में तेरे चलने से कुछ रूठ गए, कुछ छुट गए ;
रूठों को मनाना बाकी है, रोतो को हसाना बाकी है ;
कुछ हसरतें अभी अधूरी है, कुछ काम भी और ज़रूरी है ;
ख्वाइशें जो घुट गयी इस दिल में, उनको दफनाना अभी बाकी है ;
कुछ रिश्ते बनके टूट गए, कुछ जुड़ते जुड़ते छूट गए;
उन टूटे-छूटे रिश्तों के ज़ख्मों को मिटाना बाकी है ;
तू आगे चल में आता हु, क्या छोड़ तुजे जी पाऊंगा ?
इन साँसों पर हक है जिनका , उनको समझाना बाकी है ;
आहिस्ता चल जिंदगी , अभी कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है ।

17 February, 2014

तुम बदल गए हो

तेरी तलाश में निकलू भी तो क्या फायदा...!!
तुम बदल गए हो...
खो गए होते तो और बात थी...!!!!!

कोई मोल नहीं मेरा..

कितने दूर निकल गए,
रिश्तो को निभाते निभाते

खुद को खो दिया हमने,
अपनों को पाते पाते

लोग कहते है हम मुस्कुराते बहुत है ,
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते

"खुश हूँ और सबको खुश रखता हूँ,
लापरवाह हूँ फिर भी सबकी परवाह करता हूँ.

मालूम है कोई मोल नहीं मेरा.....
फिर भी,
कुछ अनमोल लोगो से रिश्ता रखता हूँ......!!!

10 November, 2012

जंजीर हो गये साऐ

किया इरादा बारम्बार  तुझे भुलाने का, 
मिला ना बहाना ही कोई मगर ठिकाने का। 
ये कैसी अजनबी दस्तक थी, कैसी आह्ट थी 
तेरे सिवा था किसे हक़ मुझे जगाने का। 
ये आँख है, कि नही देखा कुछ सिवा तेरे 
ये दिल अजब है, कि गम है इसे ज़माने का। 
वो देख लो, वो समंदर खुश्क होने लगा, 
जिसे था दावा, मेरी प्यास को बुझाने का। 
जमी पे किस लिए जंजीर हो गये साऐ, 
मुझे पता है, मगर मैं नही बताने का ।

17 June, 2012

अच्छा लगता है ...


मुझे  अब  नींद  की  तलाश  नहीं ,
अब  रातों  को  जागना  अच्छा  लगता  है ...
मुझे  नहीं  मालुम  की  तुम  मेरी  किस्मत  में  हो  या  नहीं ,
पर  खुदा  से  तुम्हे  माँगना  अच्छा  लगता  है ...
जाने  मुझे  हक  है  या  नहीं ,
... पर  तुम्हारी  परवाह  करना  अच्छा   लगता  है ...
तुमसे  प्यार  करना  सही  है  या  नहीं ,
पर  इस  एहसास  को  जीना  अच्छा  लगता  है ...
कभी  हम  साथ  होंगे  या  नहीं ,
पर  ये  ख्वाब  देखना  अच्छा  लगता  है ...
तुम  मेरे  हो  या  नहीं ,
पर  तुम्हे  ही  अपना  कहना  अच्छा  लगता  है ...
दिल  को  बहलाया  पर  मानता  ही  नहीं ,
शायद  इसे  भी  तुम्हारे  लिए  ही  धड़कना  अच्छा  लगता  है ...

बस तुम


एक  आस  एक  एहसास  मेरी  प्यास  
'और  बस  तुम '...!
एक  सवाल  एक  मजाल  तुम्हारे  ख्याल  
'और  बस  तुम '...!
एक  बात  एक  रात  तुम्हारा  साथ 
'और  बस  तुम '...!
एक  दुआ  एक  फ़रियाद  तुम्हारी  याद  
'और  बस  तुम '...!
मेरा  वजूद  मेरा  जूनून  मेरा  सुकून 
'बस  तुम '...!

28 April, 2012

बस दूर ही रहना अच्छा लगता है

उसके  बिना  अब  चुप -चाप  रहना  अच्छा  लगता  है, 
ख़ामोशी  से  दर्द  को  सहना  अच्छा   लगता  है ।
जिस हस्ती  की  याद  में  आंसू  बरसते  है,
सामने  उसके  कुछ  ना कहना  अच्छा  लगता  है।
मिल कर  उससे  बिछड़ ना  जाऊ डरता  रहता  हूँ,
इसलिए  बस दूर  ही  रहना  अच्छा लगता  है।
जानता  हूँ  की  चाहत  में  आंसू  मिलते  है,
कुछ  भी  हो  अब  इस  ज़हर  को  पीना  अच्छा लगता  है।
जी  चाहे  सब  खुशिया  ला  कर  उसको  दे  दू ,
उसके  प्यार  में  सब  कुछ  खोना  अच्छा  लगता  है।
उसका  मिलना  ना  मिलना  किस्मत  की  बात  है,
पल  पल  उसकी  याद  में  रोना  अच्छा लगता  है...।। 

04 April, 2012

मेरी जान, अभी बाकि है

सुबह बाकि है, शाम अभी बाकि है 
इस दिल के कुछ अरमान, अभी बाकि हैं 

कोई है जो मेरा होश उड़ा ले गया है 
सासें रुक गयी है, पर जान, अभी बाकि है 

की थी, मैंने भी, आसमान की चाहत कभी 
पर टूट गए हैं, उड़ान अभी बाकि है 

ये क्या गजब, हवाओं ने अपना रुख बदला 
तूफ़ान दर पे है और अंजाम, अभी बाकि है 

सुना था आँसुओं में हर गम बह जाते है 
रो-रो कर थक गया हूँ, निशान अभी बाकि है 

सोचता हूँ, किसपे लुटाऊंगा दिल की दौलत सारी 
सब कुछ तो लुट चूका,  यादो का मकान, ही बाकि है 

अब जाऊं तो कहाँ जाऊं, सुकून पाने को, ऐ खुदा... 
सासें तक जलती है, दिल का मेहमान अभी बाकि है 

ख्याल आता है क़ि बचपन क़ी गलिओं में लौट चलूँ, 
कि आज भी उन गलिओं में मेरी पहचान, अभी बाकि है 

बस एक उस खुदा का ही तो आसरा है मुझे, 
ना हो मायुस क़ि आखरी फरमान, अभी बाकि है 

वो सोचते हैं क़ि हम बद्दुआ करते है.. 
बद्दुआ दे भी, तो दे कैसे... 
उसके दिल में ही तो, मेरी जान, अभी बाकि है...

कोई दिल से कह दो

कोई दिल से कह दो, कि उम्मीद का ये बहाना छोड़े...
और भी गम है ज़माने में, ये गम पुराना छोड़े...

मैं खुश था बहुत इश्क के बगैर भी, तनहा...
उसकी यादों से कह दो, मेरे दिल में यूँ आना छोड़े...

वो राग जो बस गया है, होंठों पे गीत बनके मेरे...
उस राग से कहदो, मेरे होंठों पे गुनगुनाना छोड़े...

वो सनम, बेरहम है, जो दिल में बस गया है मेरे...
उस हमदम से कह दो, के मेरे दिल का ठिकाना छोड़े...

जो आँसु बनके बहता है मेरे इन निगाहों से भी...
उन  आँसुओं से कहदो के, मेरे आँखों में आना छोड़े...

वो ना आयेंगे कभी....
कोई दिल से कह दो, कि उम्मीद का ये बहाना छोड़े...
कोई दिल से कह दो, कि उम्मीद का ये बहाना छोड़े...

उनको फिर भी अपना मान लेते हैं

छुपा है दिल में क्या उनके, ये सब हम जान लेते हैं
मुखौटा ओढ़ने वालों को हम पहचान लेते हैं

जो राहों में तेरी यादें 
 बहुत  टकराती हैं मुझसे
तो रुक कर ख़ाक तेरे कूचे की हम छान लेते हैं

जो बोले है मेरे छत की मुंडेरों पर कोई कागा
किसी अपने के घर आने की आहट जान लेते हैं

मुझे मालूम है वो पीठ पीछे करते हैं साज़िश
मगर हम हैं कि उनको फिर भी अपना मान लेते हैं

दिल में क्या छुपा है

दिल  के  दिल  में  क्या  छुपा  है ?
ये  तो  बस  दिल  को  पता  है ..
धडकनों  पे  किसका  पहरा , 
कौन  कब  क्यूँ  दिल  में  ठहरा ? 
क्या  अजब  इस  दिल  की  अदा  है ,
सरफिरा  है , दिल  तो  कुछ  सरफिरा  है ..

ख्वाहिशों  से  आँख  मिचोली  खेलता  है  दिल  हमेशा ,
कशमकश  की  बंदिशें  भी  झेलता  है  दिल  हमेशा.. 
चेहरे  पे  इश्तिहार  लगा  कर  घूमता  है 
हसरतों  की  नुमाइश  करके  झूमता  है 
सरफिरा  है , दिल  तो  कुछ  सरफिरा  है ..

ये  समझ  ना  पाया  कोई, 
करता  है  दिल  क्यों  नादानी.. 
दिल  के  लाखों  हिस्से  हैं  और 
दिल  की  लाखों  हैं  कहानी ..
ये  दिल  जो  अटका  तो,  अटक  ही  जाता  है 
तड़पता  है,  फिर  भी  खामोश  रहता  है 
सरफिरा  है , दिल  तो  कुछ सरफिरा  है ..

13 March, 2012

तेरे होने का मज़ा और है

वो नज़र कहाँ से लाउ जो तुम्हे भुला दे,
वो दावा कहा से  लाउ जो इस दर्द को मिटा दे,
मिलना तो लिखा होता है तकदीरों में पर,
वो तकदीर ही कहाँ से लाउ जो हम दोनों को मिला दे ...

मंजिल भी खो चुके हमसफर भी नहीं रहा,
मेरी किसी भी दुआ मैं शायद असर ही नही रहा,
जब से हुयी है दिल को खबर वो बिछड़ रहा है मुझसे,
लफ्ज़ों को जोडने का तबसे हुनर भी नही रहा ...

पाने से खोने का मज़ा और है..
बंद आँखों मैं रोने का मज़ा और है..
आंसू बने लफ्ज़ और लफ्ज़ बने शायरी..
और उस शायरी में तेरे होने का मज़ा और है..

दुनिया में किसी से कभी प्यार मत करना,
अपने अनमोल आंसू इस तरह बेकार मत करना,
कांटे तो फिर भी दमन थाम लेते हैं,
फूलों पे इस तरह कभी ऐतेबार मत करना.. 

उन्होंने देखा और आंसू गिर पड़े,
भरी बरसात में जैसे फूल बिखर पड़े,
दुःख यह नहीं के उन्होंने हमे अलविदा कहा,
दुःख तो यह हैं की उसके बाद वो खुद रो पड़े.





12 March, 2012

कल एक झलक जिन्दगी की देखी

मैंने कल एक झलक जिन्दगी की देखी,
वो मेरी राह में गुनगुना रही थी ..
मैंने ढूंडा उसे इधर उधर,
वो आँख मिचोली करके मुस्कुरा रही थी..
एक अरसे के बाद आया मुझे करार,
वो सहला के मुझे सुला रही थी ..
हम दोनों क्यों ख़फ़ा हैं एक-दुसरे से,
मैं उसे और वो मुझे बता रही थी...
मैंने पुछा तूने मुझे ये दर्द क्यों दिया,
उसने कहा -
" मैं जिन्दगी हु तुझे जीना सिखा रही थी ...।।"

13 August, 2011

दिल लगता है अजनबी


कभी  कभी  यूं  ही  दिल 
लगता  है  अजनबी 
यूं  तो  है  मेरा  हमजोली 
कभी  हंसी  कभी  ठिठोली 
पर  जबसे  आया  है  तुझ पे 
दिल  लगता  है  अजनबी 
अभी  अभी  तो  कहा  था  तुझसे  
कल  का  सपना 
कोई  अपना 
अभी  अभी  पर  खो  गया  दिल 
लगता  है  अजनबी 
उन्मुक्त  गगन  मैं  उड़ता  था 
पंछी  सा  मचलता  था 
आज  क्यूँ  बंधा  जुल्फों  मैं  दिल 
लगता  है  अजनबी 
था  मेरा  दिल  आवारा 
फिरता  था  यूँ  बंजारा 
जबसे  डूबा  आँखों  मैं  तेरी दिल 
लगता  है  अजनबी 
अब  जब  खो  चुका  हूँ  तुझमे 
दाँव  लगा  बैठा  हूँ  तुझपे 
तोड़  न  देना  मेरा  जो  दिल 
लगता  है  अजनबी... 

04 August, 2011

कोई मजबूरी तो नहीं


मेरी  मोहब्बत  है  वो , कोई  मजबूरी  तो नहीं 
वो  मुझे  चाहे , या  मिल  जाये  ज़रूरी  तो  नहीं ,

यह  क्या  कुछ  कम  है  के  बसा  है  मेरी  साँसों  में 
अब  वो  सामने  हो  मेरी  आँखों  के  ज़रूरी  तो  नहीं ,

जान  कुर्बान  मेरी ,उस  की  हर  मुस्कराहट  पर 
चाहत  का  तकाज़ा  है  यही , अकाल -ऐ -ख़ुरोरी  तो  नहीं ,

अब  तू  निकल  के  आँखों  से , यादों  मैं  जा  बसा 
यही  है  कुर्बत -ऐ -चाहत , कोई  दूरी  तो  नहीं ,

उस  के  घर  की  तरफ  उठते  ही  रुक  जाते  हैं  कदम 
बदनामी  से  उस  की  डरता  हूँ , कोई  मजबूरी  तो  नहीं. 

20 July, 2011

यूँ रहो ना बने बेगाने तुम


आके बैठो मेरे  सिरहाने  तुम 
और  सोचो  ना   कुछ  बहाने  तुम 

छू  के  देखूं  तो  मानू मैं ,
सच  हो  या  ख्वाब  हो  ना  जाने  तुम .

आज  भी  मैं  तो  हूँ  फ़िदा  तुम  पर ,
हो  मेरे  अब  भी  क्या  दीवाने  तुम .

मेरी  नज़रों  मैं  डाल  कर  नज़रें ,
खुद  ही  पढ़लो ना  सब  फ़साने  तुम .

कोई  तक़रार  अब  नई  सोचो ,
फिर  ना  शिकवे  करो  पुराने  तुम .

जी  मैं  आता  है  रूठ  जाऊं  मैं ,
हंस  के  मुझको  लगो  मनाने  तुम .

मेरे  सीने  पे  सर  रखो  अपना ,
यूँ  रहो  ना  बने  बेगाने  तुम .

तू दूर है तो ही अच्छा...


मीठी है याद तेरी, अच्छा है नाम तेरा, 
ऐ दूर रहने वाले तुझको सलाम मेरा |
मगर तू दूर है तो ही अच्छा है 
कही पास आने से हो ना जाये असर कम तेरा 
यादों में तू बस गयी है गहराई तक 
इस दिल पे चलता नही है अब बस मेरा |

अभी तो लगता है तू ऐसी है तू वैसी है 
होगी अगर पास तो डरता हु, 
कही बदल ना जाये ये सोच का दायरा मेरा 
मीठी है याद तेरी अच्छा है नाम तेरा 
ऐ दूर रहने वाले तुझको सलाम मेरा..|

कल हुई थी बात तुझसे, कल सुनी  थी आवाज़ तेरी 
सुनके उस आवाज को अब तक धड़क रहा है दिल मेरा |
सोचता हु कभी तू पास आती तो कहता तुझसे अपने दिल की बात 
मगर तुने कभी सुना नही .. चली गयी तोड़ के दिल मेरा 
ऐ दूर रहने वाले तुझको सलाम मेरा