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21 August, 2016

कितना बवाल होता..!!

समंदर सारे शराब होते तो सोचो कितना बवाल होता,
हक़ीक़त सारे ख़्वाब होते तो सोचो कितना बवाल होता..!!

किसी के दिल में क्या छुपा है ये बस ख़ुदा ही जानता है,
दिल अगर बेनक़ाब होते तो सोचो कितना बवाल होता..!!

थी ख़ामोशी हमारी फितरत में तभी तो बरसो निभ गयी लोगो से,
अगर मुँह में हमारे जवाब होते तो सोचो कितना बवाल होता..!!

हम तो अच्छे थे पर लोगो की नज़र में सदा बुरे ही रहे,
कहीं हम सच में ख़राब होते तो सोचो कितना बवाल होता..??

02 August, 2016

उसे आईलाइनर पसंद था।

उसे आईलाइनर पसंद था,
मुझे काजल।

वो फ्रेंच टोस्ट और कॉफी पे मरती थी,
और मैं अदरक की चाय पे।

उसे नाइट क्लब पसंद थे,
मुझे रात की शांत सड़कें।

शांत लोग मरे हुए लगते थे उसे,
मुझे शांत रहकर उसे सुनना पसंद था।

लेखक बोरिंग लगते थे उसे,
पर मुझे मिनटों देखा करती जब मैं लिखता।

वो न्यूयॉर्क के टाइम्स स्कवायर, इस्तांबुल के ग्रैंड बाजार में शॉपिंग के सपने देखती थी,
मैं असम के चाय के बागानों में खोना चाहता था।
मसूरी के लाल डिब्बे में बैठकर सूरज डूबना देखना चाहता था।

उसकी बातों में महँगे शहर थे,
और मेरा तो पूरा शहर ही वो थी।

न मैंने उसे बदलना चाहा न उसने मुझे।
एक अरसा हुआ दोनों को रिश्ते से आगे बढ़े।

कुछ दिन पहले उनके साथ रहने वाली एक दोस्त से पता चला,
वो अब शांत रहने लगी है,
लिखने लगी है,
मसूरी भी घूम आई,
लाल डिब्बे पर अँधेरे तक बैठी रही।
आधी रात को अचानक से उनका मन
अब चाय पीने को करता है।

और मैं...

मैं भी अब अक्सर कॉफी पी लेता हूँ
किसी महँगी जगह बैठकर।

07 July, 2016

शराब पीता हूँ...

शराब पीता हूँ मैं तो इसमें भला क्या बुराई है,
ताना देने वालों मुझसे पूछो क्या गमे जुदाई है।
प्यार हुआ है जबसे ‘मैं’ कहीं खो सा गया हूँ,
इश्क़ करने वालों उल्फ़त से अच्छी तनहाई है।
दिल टूटा दर्द हुआ अश्क निकले मैं खूब रोया,
पहले हाले दिल तनहाई था अब दर्दे दिल तनहाई है।

रिश्ते टूटे आस छूटी अब क्यूँ जीऊँ क्यूँ कमाऊ,
अब ऐसा कौन है शहर में जिससे मेरी आशनाई है।
जाम लगा जो होठों से तो दिल को सुकून मिला थोड़ा,
मैखाना है अपना या साकी है, बाकी दुनिया हरजाई है।
दिल मेरा दर्द मेरा, शाम मेरी जाम मेरा मर्जी मेरी,
ऐ दुनिया तुझे भुलाने की बस यही महफूज दवाई है।

शराब पीता हूँ...

शराब पीता हूँ मैं तो इसमें भला क्या बुराई है,
ताना देने वालों मुझसे पूछो क्या गमे जुदाई है।
प्यार हुआ है जबसे ‘मैं’ कहीं खो सा गया हूँ,
इश्क़ करने वालों उल्फ़त से अच्छी तनहाई है।
दिल टूटा दर्द हुआ अश्क निकले मैं खूब रोया,
पहले हाले दिल तनहाई था अब दर्दे दिल तनहाई है।

रिश्ते टूटे आस छूटी अब क्यूँ जीऊँ क्यूँ कमाऊ,
अब ऐसा कौन है शहर में जिससे मेरी आशनाई है।
जाम लगा जो होठों से तो दिल को सुकून मिला थोड़ा,
मैखाना है अपना या साकी है, बाकी दुनिया हरजाई है।
दिल मेरा दर्द मेरा, शाम मेरी जाम मेरा मर्जी मेरी,
ऐ दुनिया तुझे भुलाने की बस यही महफूज दवाई है।