Showing posts with label Sochta hu Kabhi Kabhi. Show all posts
Showing posts with label Sochta hu Kabhi Kabhi. Show all posts

31 July, 2020

सबको खुश देखना चाहता हूँ

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ

दिल हल्का करने को मैं शायरी सुनाता हूँ

ये शायरी नहीं है,और ना हुनर है मेरा
ये दर्द है, जिसे मुस्कुराहटों से छुपाता हूँ

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ....

मुझे जैसे लोग अक्सर यूँ ही भुला दिए जाते हैं
मैं बात सबको याद दिलाना चाहता हूं

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ....

अंधे निकालते हैं  कमिया मेरे क़िरदार में और...
बहरों को ये शिकायत है कि गलत बताता हूं ...!!!

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ....

हर किसी ने जिंदगी भर नकारा समझा मुझको
जिंदगी तू वो किताब तो नहीं जिसे मैं पढ़ना चाहता हूं

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ....

जब बेवफाई की बात आई, अव्वल हम ही निकले....!!
गवाही आईने में क्या दी जानना चाहता हूं

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ....

महफिल थी दुआओं की,तो मैंने भी एक दुआ मांग ली !!"
मैं तो बस सबको खुश देखना चाहता हूँ

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ....

अब तो खुशी दे कर देख ले ए खुदा
मैं इन दुखों से नहीं मरना चाहता हूं

हज़ारों दिक्कतें हैं, चलो पहली बताता हूँ....

वो "मैं "जो मुझमें जिंदा था, मार दिया मैंने !!
मैं अपने ख़ुदा से मिलना चाहता हूँ

हज़ारों दिक्कतें हैं, यह पहली बताई थी...
दिल हल्का करने को मैंने शायरी सुनाई थी..

21 August, 2016

मैं ही था बेवफा

एक मोहब्बत है और उसकी एक निशानी है 
एक दिल है जैसे कोई हवेली पुरानी है 

सफ़र रात का है और रात भी तूफानी है 

समन्दर ही समन्दर है कश्ती भी डूब जानी है 

इब्तेदा-ए-इश्क से इन्तहा-ए-इश्क तक 

मैं ही था बेवफा और मैंने ही वफ़ा निभानी है 

मैं लौट आया हूँ मंजिल को देखकर 

यहाँ तो यादों की वीरानी ही वीरानी है 


ये इंतजार ख़त्म क्यों नही होता किससे पूछूँ

क्या कोई मंजिल मेरा मुक़द्दर है या यही मेरी अधूरी कहानी है  

कितना बवाल होता..!!

समंदर सारे शराब होते तो सोचो कितना बवाल होता,
हक़ीक़त सारे ख़्वाब होते तो सोचो कितना बवाल होता..!!

किसी के दिल में क्या छुपा है ये बस ख़ुदा ही जानता है,
दिल अगर बेनक़ाब होते तो सोचो कितना बवाल होता..!!

थी ख़ामोशी हमारी फितरत में तभी तो बरसो निभ गयी लोगो से,
अगर मुँह में हमारे जवाब होते तो सोचो कितना बवाल होता..!!

हम तो अच्छे थे पर लोगो की नज़र में सदा बुरे ही रहे,
कहीं हम सच में ख़राब होते तो सोचो कितना बवाल होता..??

02 August, 2016

उसे आईलाइनर पसंद था।

उसे आईलाइनर पसंद था,
मुझे काजल।

वो फ्रेंच टोस्ट और कॉफी पे मरती थी,
और मैं अदरक की चाय पे।

उसे नाइट क्लब पसंद थे,
मुझे रात की शांत सड़कें।

शांत लोग मरे हुए लगते थे उसे,
मुझे शांत रहकर उसे सुनना पसंद था।

लेखक बोरिंग लगते थे उसे,
पर मुझे मिनटों देखा करती जब मैं लिखता।

वो न्यूयॉर्क के टाइम्स स्कवायर, इस्तांबुल के ग्रैंड बाजार में शॉपिंग के सपने देखती थी,
मैं असम के चाय के बागानों में खोना चाहता था।
मसूरी के लाल डिब्बे में बैठकर सूरज डूबना देखना चाहता था।

उसकी बातों में महँगे शहर थे,
और मेरा तो पूरा शहर ही वो थी।

न मैंने उसे बदलना चाहा न उसने मुझे।
एक अरसा हुआ दोनों को रिश्ते से आगे बढ़े।

कुछ दिन पहले उनके साथ रहने वाली एक दोस्त से पता चला,
वो अब शांत रहने लगी है,
लिखने लगी है,
मसूरी भी घूम आई,
लाल डिब्बे पर अँधेरे तक बैठी रही।
आधी रात को अचानक से उनका मन
अब चाय पीने को करता है।

और मैं...

मैं भी अब अक्सर कॉफी पी लेता हूँ
किसी महँगी जगह बैठकर।

07 July, 2016

शराब पीता हूँ...

शराब पीता हूँ मैं तो इसमें भला क्या बुराई है,
ताना देने वालों मुझसे पूछो क्या गमे जुदाई है।
प्यार हुआ है जबसे ‘मैं’ कहीं खो सा गया हूँ,
इश्क़ करने वालों उल्फ़त से अच्छी तनहाई है।
दिल टूटा दर्द हुआ अश्क निकले मैं खूब रोया,
पहले हाले दिल तनहाई था अब दर्दे दिल तनहाई है।

रिश्ते टूटे आस छूटी अब क्यूँ जीऊँ क्यूँ कमाऊ,
अब ऐसा कौन है शहर में जिससे मेरी आशनाई है।
जाम लगा जो होठों से तो दिल को सुकून मिला थोड़ा,
मैखाना है अपना या साकी है, बाकी दुनिया हरजाई है।
दिल मेरा दर्द मेरा, शाम मेरी जाम मेरा मर्जी मेरी,
ऐ दुनिया तुझे भुलाने की बस यही महफूज दवाई है।

शराब पीता हूँ...

शराब पीता हूँ मैं तो इसमें भला क्या बुराई है,
ताना देने वालों मुझसे पूछो क्या गमे जुदाई है।
प्यार हुआ है जबसे ‘मैं’ कहीं खो सा गया हूँ,
इश्क़ करने वालों उल्फ़त से अच्छी तनहाई है।
दिल टूटा दर्द हुआ अश्क निकले मैं खूब रोया,
पहले हाले दिल तनहाई था अब दर्दे दिल तनहाई है।

रिश्ते टूटे आस छूटी अब क्यूँ जीऊँ क्यूँ कमाऊ,
अब ऐसा कौन है शहर में जिससे मेरी आशनाई है।
जाम लगा जो होठों से तो दिल को सुकून मिला थोड़ा,
मैखाना है अपना या साकी है, बाकी दुनिया हरजाई है।
दिल मेरा दर्द मेरा, शाम मेरी जाम मेरा मर्जी मेरी,
ऐ दुनिया तुझे भुलाने की बस यही महफूज दवाई है।

05 November, 2015

अक्सर मुस्कुरा लिया करता हूँ

उलझने हैं बहुत...
सुलझा लिया करता हूँ ,
फोटो खिंचवाते वक़्त मैं अक्सर...
मुस्कुरा लिया करता हूँ "
क्यूँ नुमाइश
करूँ मैं अपने माथे पर शिकन की,
मैं अक्सर मुस्कुरा के इन्हें..
मिटा दिया करता हूँ.."
क्यूंकि..
"जब लड़ना है खुद को खुद ही से
हार-जीत में इसलिए कोई फ़र्क नहीं रखता हूँ
हारूं या जीतूं कोई रंज नहीं
कभी खुद को जिता देता हूँ
कभी खुद से जीत जाता हूँ.....!!"
इसीलिए अक्सर मुस्कुरा लिया करता हूँ।

27 July, 2014

आहिस्ता चल ज़िन्दगी..

आहिस्ता चल ज़िन्दगी, अभी कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है,
कुछ दर्द मिटाना बाकी है, कुछ फ़र्ज़ निभाना बाकी है;
रफ्तार में तेरे चलने से कुछ रूठ गए, कुछ छुट गए ;
रूठों को मनाना बाकी है, रोतो को हसाना बाकी है ;
कुछ हसरतें अभी अधूरी है, कुछ काम भी और ज़रूरी है ;
ख्वाइशें जो घुट गयी इस दिल में, उनको दफनाना अभी बाकी है ;
कुछ रिश्ते बनके टूट गए, कुछ जुड़ते जुड़ते छूट गए;
उन टूटे-छूटे रिश्तों के ज़ख्मों को मिटाना बाकी है ;
तू आगे चल में आता हु, क्या छोड़ तुजे जी पाऊंगा ?
इन साँसों पर हक है जिनका , उनको समझाना बाकी है ;
आहिस्ता चल जिंदगी , अभी कई क़र्ज़ चुकाना बाकी है ।

17 February, 2014

तुम बदल गए हो

तेरी तलाश में निकलू भी तो क्या फायदा...!!
तुम बदल गए हो...
खो गए होते तो और बात थी...!!!!!

10 November, 2012

जंजीर हो गये साऐ

किया इरादा बारम्बार  तुझे भुलाने का, 
मिला ना बहाना ही कोई मगर ठिकाने का। 
ये कैसी अजनबी दस्तक थी, कैसी आह्ट थी 
तेरे सिवा था किसे हक़ मुझे जगाने का। 
ये आँख है, कि नही देखा कुछ सिवा तेरे 
ये दिल अजब है, कि गम है इसे ज़माने का। 
वो देख लो, वो समंदर खुश्क होने लगा, 
जिसे था दावा, मेरी प्यास को बुझाने का। 
जमी पे किस लिए जंजीर हो गये साऐ, 
मुझे पता है, मगर मैं नही बताने का ।

13 February, 2012

तेरी यादों की सुनहरी धूप


तेरी यादों की सुनहरी धूप , एक जशन है मेरी जिन्दगी का
गीली रेत पर छोड के अपने निशा, लिखती जाती है कोई गीत खुशी का
तेरे साथ बिताया हर लम्हा, दिल की धडकन में कोई साज छेड जाता है
आज भी देती है जब दस्तक तुम्हारी यादें, तेरा अक्स नगमों में बदल जाता है
मैं नहीं जानता ये यादें ना होती तो क्या होता?
मगर ये जानता हू, ना कोई खुशनुमा सरगम का फलसफा होता, ना जिन्दगी जीने का मायना होता
ये यादें एक जशन है मेरी जिन्दगी का, जो लिखती जाती है कोई गीत खुशी का।

13 August, 2011

दिल लगता है अजनबी


कभी  कभी  यूं  ही  दिल 
लगता  है  अजनबी 
यूं  तो  है  मेरा  हमजोली 
कभी  हंसी  कभी  ठिठोली 
पर  जबसे  आया  है  तुझ पे 
दिल  लगता  है  अजनबी 
अभी  अभी  तो  कहा  था  तुझसे  
कल  का  सपना 
कोई  अपना 
अभी  अभी  पर  खो  गया  दिल 
लगता  है  अजनबी 
उन्मुक्त  गगन  मैं  उड़ता  था 
पंछी  सा  मचलता  था 
आज  क्यूँ  बंधा  जुल्फों  मैं  दिल 
लगता  है  अजनबी 
था  मेरा  दिल  आवारा 
फिरता  था  यूँ  बंजारा 
जबसे  डूबा  आँखों  मैं  तेरी दिल 
लगता  है  अजनबी 
अब  जब  खो  चुका  हूँ  तुझमे 
दाँव  लगा  बैठा  हूँ  तुझपे 
तोड़  न  देना  मेरा  जो  दिल 
लगता  है  अजनबी... 

20 July, 2011

तू दूर है तो ही अच्छा...


मीठी है याद तेरी, अच्छा है नाम तेरा, 
ऐ दूर रहने वाले तुझको सलाम मेरा |
मगर तू दूर है तो ही अच्छा है 
कही पास आने से हो ना जाये असर कम तेरा 
यादों में तू बस गयी है गहराई तक 
इस दिल पे चलता नही है अब बस मेरा |

अभी तो लगता है तू ऐसी है तू वैसी है 
होगी अगर पास तो डरता हु, 
कही बदल ना जाये ये सोच का दायरा मेरा 
मीठी है याद तेरी अच्छा है नाम तेरा 
ऐ दूर रहने वाले तुझको सलाम मेरा..|

कल हुई थी बात तुझसे, कल सुनी  थी आवाज़ तेरी 
सुनके उस आवाज को अब तक धड़क रहा है दिल मेरा |
सोचता हु कभी तू पास आती तो कहता तुझसे अपने दिल की बात 
मगर तुने कभी सुना नही .. चली गयी तोड़ के दिल मेरा 
ऐ दूर रहने वाले तुझको सलाम मेरा 



15 July, 2011

एक शहर है!

****
सड़के किनारे खड़ा वह शख़्स जिसे हर रोज़ वहाँ से गुजरने वाला देखता होगा। मगर शायद ही उसे कोई पहचानता होगा। उससे मुलाकात हर बार पहली बार की ही बनकर रह जाती है और वो मेरी याद में नहीं बनती। मैं उसे देखता हूँ, मैं उससे मिला हूँ मगर पहचान नहीं सकता। कभी सोचता हूँ उसकी तस्वीर खींचलू मगर वो पल में गुम हो जाता है। रेडलाइट की भीड़ में वो गायब हो जाने वाला चेहरा नहीं है मगर फिर भी खो जाता है। चेहरे पर हर मुलाकात मे वे नई दाड़ी मूँछ लगाये घूमता है - नई कोई ड्रेस में, नई किसी टोपी में - हाथों में पन्नी लिये आवाज़ नहीं मारता बस सीटी बजाता है। दाड़ी मूँछ नकली होती है मगर वो असली है। उसके लिये शहर के ये दो मिनट ही उस आठ घंटे की तरह है जिसमें वो उस झलक से कितनों के जहन पर अपनी ओर खींचता है। लेकिन हम दोनों का मिलन शहर मे खो जाने के बाद का है।



***
एक आसान सा रास्ता - मेरा नहीं है मगर मैं उसका जरूर हूँ। वो मेरे वक़्त है मगर मेरे वक़्त का उसके ऊपर कोई जोर नहीं है। कोई खामोश निगाह नियमित घूर रही है। वो किसी की नहीं है। मगर सब उसके घेरे मे है। वे बदलती है और बदल सकती है। किसी खास लिबास मे नहीं है। वे गायब होना भी जानती है। कोई दूर खड़ा सोचता है ये निगाह मेरी है - और मैं पास मे खड़ा कल्पना करता हूँ ये निगाह उसकी है। हर कोई एक दूसरे की निगाह का कर्जदार बना है।



***
रोशनी तीर सी जमीन पर गिर रही है। सब उसमें हैं - कोई बच नहीं सकता। कोई बचना भी नहीं चाहता। हर तीर उन नातों सी बनी है जो किसी को एक दूसरे का नहीं बनाती मगर एक दूसरे को बिना देखे जाने नहीं देती।

रेडलाइट पर गाड़ियाँ - रूकने हैं, ठहराव मे नहीं। समय के भीतर है जो गठ दिया गया है। पर ये कहने वाला कौन है? कहाँ है, किस रूप में है, किस लिबास में है? जो उस जगह को, रूकने को, गाड़ियों को एक साथ देख सकता है। जो शायद उसमें नहीं है - मगर शायद उससे दूर भी नहीं है। वे उसके साथ भी है लेकिन उसके भीतर नहीं है।

सफ़र मे है . . . .एक शहर है..!!